महालेखा नियंत्रक

महालेखा नियंत्रक

महालेखा नियंत्रक केन्द्र सरकार के शीर्ष लेखांकन प्राधिकारी हैं और वह भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की सलाह पर केन्द्र एवं राज्य सरकार के लेखाओ के स्वरूपों के निर्धारण के लिए संविधान के अनुच्छेद 150 के अंतर्गत राष्ट्रपति की शक्तियों का प्रयोग करते हैं। महालेखा नियंत्रक अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित कार्यों के लिए उत्तरदायी हैं:

  • गैर सरकारी मासिक लेखे तैयार करना और उनका समेकन करना। संघ सरकार के लेखाओं की विस्तृत विश्लेषणपरक समीक्षा प्रत्येक माह की समाप्ति के पश्चात् चार सप्ताह के भीतर वित्त मंत्री के समक्ष प्रस्तुत की जाती है। इस समीक्षा में आय, व्यय, राजकोषीय घाटे, वित्त पोषण के स्रोत आदि के मुख्य पहलू शामिल होते हैं ताकि वर्ष के दौरान उच्चतम स्तर पर इनके विषय में पता लगाना आसान हो सके। वित्त वर्ष के अंत में, वर्ष के अनंतिम लेखे (असंपरीक्षित) भी तैयार किए जाते हैं। अक्तूबर, 1998 से चुनिंदा लेखांकन डाटा प्रत्येक माह इंटरनेट पर निम्नलिखित वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराए जाते हैं।
    • http://www.indiagov.org (External Website that opens in a new window)
    • http://www.meadev.gov.in (External Website that opens in a new window)
  • संघ सरकार के वार्षिक विनियोजन लेखे (सिविल) और वित्त लेखे संसद में प्रस्तुत करना। वर्ष 1996-97 के लिए उक्त लेखे 5 जून, 1998 को बजट सत्र के दौरान भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट के साथ संसद के समक्ष प्रस्तुत किए गए थे।
  • सिविल मंत्रालयों में अच्छी और प्रभावी आंतरिक लेखापरीक्षा और पूर्व जांच प्रणाली सुनिश्चित करना।
  • शीघ्र और सही लेखांकन में सहयोग।
  • भारत सरकार की विशेषत: आयकर, सीमा-शुल्कों और केन्द्रीय उत्पाद शुल्क से संबंधित आय की प्रभावी और कड़ी मॉनीटरिंग सुनिश्चित करना।
  • लेखाओं की गुणता में लगातार उन्नयन करके प्रबंधन के उपकरण तौर पर लेखाओं की प्रभावी उपयोगिता को सक्षम बनाना ताकि सरकार के भीतर बेहतर वित्तीय नियंत्रण हो सके।
  • महालेखा नियंत्रक का संगठन, भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के सरकारी वितरण और बैंकिंग व्यरवस्था के लिए भी उत्तरदायी है। महालेखा नियंत्रक सतत अधार पर भारतीय रिजर्व बैंक और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ समय-समय पर बातचीत करके वर्तमान प्रणाली पर कड़ी निगरानी करता है।
  • महालेखा नियंत्रक प्रत्येक वर्ष ‘लेखे एक नजर में’ पुस्तिका प्रकाशित करते हैं जिसमें सरकारी आय और व्यय की विस्तृ‍त और महत्वपूर्ण विशेषताओं का उल्लेख होता है।
  • महालेखा नियंत्रक सभी सिविल मंत्रालयों में सरकारी लेखांकन कार्यों के कंप्यूटरीकरण का कार्य देख रहे हैं। उन्होंने पांच लेखांकन पैकेज – प्रधान लेखा कार्यालयों में वाउचर स्तर के कंप्यूटरीकरण के लिए आईएमपीएलआरओवीई, प्रधान लेखा कार्यालयों में लेखाओं के समेकन के लिए कॉन्टेक्ट, मुख्य लेखा नियंत्रक के कार्यालय में लेखाओं के समेकन के लिए गेन्स, क्षेत्रीय कार्यालयों से वार्षिक लेखा डाटा एकत्र करने के लिए एससीटी और भारत सरकार के वार्षिक वित्त लेखे तैयार करने के लिए फाइनएक्ट पहले ही लागू कर दिए हैं।
  • सभी प्रधान लेखा कार्यालय लेखाओं के समेकन के लिए केवल कॉन्टेक्ट का ही उपयोग कर रहे हैं। इसके अलावा, कुछ प्रधान लेखा कार्यालयों में लेखाओं का दस्ती समेकन बंद कर दिया है। सभी कार्यालयों में कंप्यूटरीकरण के उत्तरोत्तर विस्तार के प्रयास किए जा रहे हैं।
  • प्रधान लेखा कार्यालय के लिए ओरेकल प्लेटफॉर्म पर एक नया व्यापक सॉफ्टवेयर कॉन्टेक्ट (कई नई विशेषताओं के साथ) पूरा होने वाला है। इस नए सॉफ्टवेयर को प्रधान लेखा कार्यालयों में मौजूदा कॉन्टेक्ट के स्थान पर इंस्टाल किया जाएगा। केन्द्र सरकार के विभिन्न‍ मंत्रालयों आदि में कार्यरत अधिकारियों को लेखांकन बजट, वित्तीय प्रबंधन, व्यय नियंत्रण, आंतरिक लेखापरीक्षा, प्रशासनिक-सह-संस्थापना मामलों में गहन प्रारंभिक और सेवाकालीन प्रशिक्षण देने और कंप्यूटर एप्लीकेशन के विकास और उपयोग में प्रारंभिक और उन्नत स्तरीय प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से फरवरी, 1992 में सरकारी लेखा एवं वित्त संस्था‍न की स्थापना की गई थी। इस संस्थान ने कोलकाता, चेन्नै और मुम्बई में अपने क्षेत्रीय केन्द्र स्थापित किए हैं। इस संस्थान ने विभिन्न लेखांकन संगठनों, आहरण एवं संवितरण अधिकारियों और अन्य केन्द्रीय सरकारी उपक्रमों के 6643 से अधिक अध‍िकार‍ियों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया है। संस्थान को आईटीईसी कार्यक्रमों के तहत विकासशील देशों के अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए विदेश मंत्रालय द्वारा भी अनुमोदन दिया गया है। श्रीलंका सरकार के अधिकारियों के लिए 15.11.98 से 04.12.98 तक पाठ्यक्रमों का आयोजन किया गया। भारतीय सिविल लेखा सेवा के अधिकारियों को राष्ट्रीय वित्त प्रबंधन संस्थान में उनके प्रारंभिक प्रशिक्षण के पश्चात् इस संस्थान में उच्च स्तरीय व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।